HUMARI DOSTI

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Monday, January 11

ये बांत है उस रात की ,



ये बांत है उस रात की ,
जब चुपके से मुझसे तुम मिलने आई थी ,
चेहरे को घुंघट मे छिपाकर धीरे से मुस्कराई थी,
फिर तुमने मुझको एक बात बताई थी,
एक मिठाई भी खिलाई थी,

उस रात सब थम सा गया था,
जब तुमने प्यार का इजहार किया था,

तभी मम्मी की आवाज आई
वो मुझे नींद  से जगा गई,
कितना प्यारा सपना था,
तुमने मुझे अपना बनया था,
कितना प्यारा सपना था //

Friday, January 1

मुझको उसने सिखाया है अपनी तरह जीना





क्यों उसके आँखों का काजल ,छा जाता बन कर बादल ?                      
क्यों उसके माथे की बिंदिया, उड़ा ले जाती निंदिया ?
क्यों उसके होंठो की  मुस्कराहट ,देती है कुछ आहट है ? 
क्यों उसके रेशमी  बाल,  छा  जाते घटा  बन हर  साल ?
न जाने क्यों उसकी हर अदा मे होना चाँहू  फ़िदा ?


कभी न हो वो मुझसे जुदा,
क्यों लगता है डर मुझको आने वाले कल से ?
क्यों हैं ,मुझे इतना भरोसा उससे ?                                    
क्यों नहीं डरता मै अब किसी हार से,


शायद  जादू है ये उसके प्यार का ,
वो मुझे न जाने कितने,
 सवालो के जाल मे फँसाती है /
तन्हाई मे भी मुझको हँसाती है,


यकीं है मुझे खुद से ज्यादा उस पर,
अगर गया मै भटक   भी  तो ,
रहेगी सही राह दिखने के  लिए वो  यहाँ पर /
क्यों मेरे सवाल  इतने उलझे  हुए  है?
फिर भी ये उसके लिए सुलझे हुए है /


मुझको उसने सिखाया है  अपनी तरह जीना,
हर गम को  ख़ुशी  ख़ुशी सहना /

Tuesday, December 29

तुम किन यांदो मे खो जाती हो?




आँखों से दिल की धड़कन तक,
धड़कन से नींदों की khwahish  तक
सिर्फ  तुम ही तुम नजर आती हो,
मेरा चैन चुरा कर तुम किन
किन यांदो में खो जाती हो?

सांसो मे तुम्हारा नाम
होठो पे प्यार का  पैगाम,
क्यों तुम मुझे ये सुकून दे जाती हो
क्यों मुझे इतना तड़पाती हो?

बोलो भला मेरा चैन चुरा कर,
 तुम किन यांदो मे खो जाती हो?

तुम्हारे एक झलक से मेरा दिल खिल उठता है,
जैसे फूलो की बहार को तुम एक नया रंग दे जाती हो
अपनी यांदो को मेरे दिल  मे खुशबू का संग दे  जाती हो
आखिर तुम मुझे क्यों इतना तड़पाती   हो
बोलो भला मेरा चैन चुरा कर,
 तुम किन यांदो मे खो जाती हो?